अकाउंटेंट जनरल (AG) की ताज़ा रिपोर्ट में यह खुलासा हुआ है कि गैर-सरकारी एजेंसियों से प्राप्त राशि, जो सिंचाई और अन्य जल योजनाओं पर खर्च की जानी थी, उसे सरकारी खजाने में जमा करने की बजाय अधिकारियों ने अपने निजी बैंक खातों में ट्रांसफर कर दिया।
यह रिपोर्ट पिछले महीने विधानसभा में पेश हुई थी, जिसके बाद प्रमुख सचिव और प्रमुख अभियंता ने सभी मुख्य अभियंताओं को स्पष्टीकरण देने के आदेश जारी किए थे। लेकिन आदेश जारी होने के बावजूद अभी तक किसी भी अधिकारी पर ठोस कार्रवाई होती नहीं दिख रही है।
🔍 1300 करोड़ कैसे हुए ग़ायब?
AG रिपोर्ट में बताया गया कि:
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मार्च 2023 तक विभाग ने 11,311 करोड़ के लेन-देन दर्ज किए
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इसमें से करीब 1300 करोड़ रुपए निजी नोडल बैंक खातों में जमा पाए गए
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जबकि नियम साफ कहते हैं कि हर भुगतान ट्रेज़री में जमा होना अनिवार्य है
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2015 के सरकारी आदेश का खुला उल्लंघन किया गया
सूत्रों के अनुसार, इस फंड को केवल “होल्ड” कर दिया गया है।
कई बार संपर्क करने के बावजूद मुख्य अभियंता विनोद कुमार देवड़ा ने फोन रिसीव नहीं किया। वहीं, विभागीय मंत्री तुलसी सिलावट भी पूरे मामले से बचते हुए नज़र आए।
🏛️ AG ने जताई बड़ी गड़बड़ी की आशंका
अकाउंटेंट जनरल मध्य प्रदेश के सभी विभागों के लेन-देन की समीक्षा करता है। समीक्षा के दौरान यह स्पष्ट हुआ कि:
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राशि ट्रेज़री में नहीं पहुँचाई गई
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अधिकारियों ने फंड को निजी खातों में ‘होल्ड’ किया
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यह पैसों को रोककर घपला करने का गंभीर संकेत है
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यदि पैसा दूसरी योजनाओं में खर्च किया गया, तो उसका पूरा हिसाब देना होगा
AG ने अपनी रिपोर्ट सीधे जल संसाधन विभाग को भेजते हुए जांच और स्पष्टीकरण की मांग की है।
⚖️ क्या होगी कार्रवाई?
यदि जांच में यह रकम अधिकारियों के निजी खातों में पाई जाती है:
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उन पर जुर्माना व वसूली की कार्रवाई
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बैंक से वसूला गया ब्याज भी सरकार को जमा कराना होगा
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नियम उल्लंघन पर विभागीय कार्रवाई और निलंबन संभव
लेकिन रिपोर्ट आने के एक महीने बाद भी कोई बड़ी कार्रवाई नहीं हुई है—यही सबसे बड़ा सवाल है।
🗳️ राजनीतिक घमासान — कांग्रेस ने हमला बोला, BJP ने बचाव किया
🔴 कांग्रेस का आरोप:
कांग्रेस प्रवक्ता संगीता शर्मा ने कहा:
“1300 करोड़ अफसरों के खातों में कैसे पहुंचे? यह सरकार की सबसे बड़ी प्रशासनिक विफलता है। जिन योजनाओं के लिए पैसा आया, वे अधूरी रह गईं। यह सीधा-सीधा भ्रष्टाचार है।”
🔵 BJP का जवाब:
BJP प्रवक्ता गुंजन चौकसे ने कहा:
“मोहन यादव सरकार जीरो टॉलरेंस की नीति पर चलती है। जांच होगी और दोषियों पर कार्रवाई तय है। पिछले दो सालों में सरकार ने कई मामलों में कठोर कार्रवाई की है।”
📌 निष्कर्ष
1300 करोड़ रुपए का यह कथित घोटाला सिर्फ वित्तीय कदाचार नहीं, बल्कि सिस्टम की गंभीर खामी को उजागर करता है। सवाल यह है कि इतनी बड़ी राशि निजी खातों में जाने के बावजूद अब तक कार्रवाई क्यों नहीं हुई?


