गौसंवर्धन बोर्ड के डिप्टी डायरेक्टर पर निवेशकों को धमकाने के आरोप, स्वावलंबी गौशाला योजना पर उठे सवाल

AI से ली गई तस्वीर

भोपाल। मध्य प्रदेश सरकार की महत्वाकांक्षी स्वावलंबी गौशाला योजना को लेकर एक नया विवाद सामने आया है। गौसंवर्धन बोर्ड के डिप्टी डायरेक्टर डॉ. प्रवीण शिंदे पर योजना से जुड़े निवेशकों और सामाजिक संगठनों ने धमकाने एवं अभद्र व्यवहार करने के गंभीर आरोप लगाए हैं। शिकायतकर्ताओं का दावा है कि बैठक के दौरान उन्होंने निवेशकों से कहा कि विभाग में काम करना है तो उनके हिसाब से चलना होगा, अन्यथा टेंडर कभी भी निरस्त किया जा सकता है।

जानकारी के अनुसार 27 मई 2026 को वल्लभ भवन में स्वावलंबी गौशाला योजना की समीक्षा बैठक आयोजित की गई थी, जिसमें पशुपालन मंत्री लखन पटेल, विभागीय अधिकारी और विभिन्न निवेशक संस्थाओं के प्रतिनिधि शामिल हुए थे। बैठक के बाद हुई विभागीय चर्चा के दौरान निवेशकों ने टेंडर प्रक्रिया पूरी होने के बावजूद कार्यों में हो रही देरी पर सवाल उठाए। आरोप है कि इसी दौरान डिप्टी डायरेक्टर डॉ. शिंदे ने आपत्ति जताते हुए कथित रूप से निवेशकों को चेतावनी भरे लहजे में जवाब दिया।

मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव से शिकायत

भोपाल में गौशाला संचालन का टेंडर प्राप्त करने वाली संस्था ग्लोबल रिसर्च फाउंडेशन के अध्यक्ष राजकुमार दीक्षित ने मुख्यमंत्री, पशुपालन मंत्री और मुख्य सचिव को लिखित शिकायत भेजकर मामले की जांच और कार्रवाई की मांग की है। शिकायत में कहा गया है कि योजना के माध्यम से प्रदेश में लगभग 800 करोड़ रुपये के निवेश की प्रक्रिया अंतिम चरण में है और ऐसे समय में जिम्मेदार अधिकारियों का व्यवहार निवेशकों का मनोबल तोड़ने वाला है।

800 करोड़ निवेश और गौवंश संरक्षण का लक्ष्य

राज्य सरकार की इस योजना का उद्देश्य प्रदेश में बेसहारा गौवंश की समस्या का स्थायी समाधान करना है। योजना के तहत निजी सहभागिता के माध्यम से बड़े पैमाने पर स्वावलंबी गौशालाओं का संचालन किया जाना है। निवेशकों का कहना है कि वे लाभ कमाने की बजाय गौसंरक्षण और सामाजिक दायित्व की भावना से इस योजना से जुड़े हैं।

पहले भी चर्चा में रही है योजना

गौरतलब है कि स्वावलंबी गौशाला योजना को लेकर प्रदेश सरकार देश और विदेश में बसे भारतीय निवेशकों को भी जोड़ने का प्रयास कर रही है। योजना के तहत 100 से 500 एकड़ तक भूमि पर सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) मॉडल के माध्यम से गौशालाओं के संचालन की परिकल्पना की गई है, जिससे बेसहारा गौवंश को संरक्षण और रोजगार के नए अवसर दोनों उपलब्ध हो सकें।

एमपी हेडलाइन मामले की निष्पक्ष जांच और संबंधित पक्षों की आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार कर रहा है। यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो यह न केवल निवेशकों के विश्वास को प्रभावित करेगा बल्कि प्रदेश की महत्वाकांक्षी गौसंवर्धन योजना पर भी प्रश्नचिह्न खड़े कर सकता है।

 

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