‘पोकलेन”चला पहाड़’ की ओर…

मध्य प्रदेश के नदियों से लगातार आ रही रेत के अवैध उत्खनन की खबरों और सरकार की लगातार हो रही फजीहतों के बीच, शिवराज सरकार ने सोमवार को सुबह-सुबह एक ऐतिहासिक और चौकाने वाला फैसला ले लिया कि नर्मदा से रेत उत्खनन आगामी आदेश तक बंद. वैध-अवैध, मैनुअल-मशीन सारे बंद. यही नही प्रदेश के दूसरे नदियों से भी पोकलैन या दूसरे मशीनों से भी रेत निकालने पर तत्काल प्रभाव से प्रतिबंध, है न ऐतिहासिक..!
और विस्तार से समझाएं तो सरकार ने उन पोकलैन मशीनों को नदियों से हटाने का फैसला किया है, जिसे  उसने कभी माना ही नही  कि इससे रेत निकाला जाता है  और उस नर्मदा से रेत का काम बंद करने की घोषणा कर दी जहां नाक के नीचे चल रहे अवैध खनन को कभी स्वीकार ही नही किया. अस्थायी सही ! पर, एक कमेटी के रिपोर्ट आने तक नर्मदा मे रेत खनन पूर्ण प्रतिबंध.
शंका है कि बंद तो होंगे, पर वैध. अवैध कैसे रुकेगा यह अभी भी सवाल है. चूंकि आपने अवैध का चालू रहना तो कभी स्वीकार ही नही किया तो अब बंद होना कैसे स्वीकार करेंगे. मीडिया, विपक्ष तो सबूत दिखा दिखा कर थक गये थे. प्रदेश के सभी बड़ी नदियों मे अवैध रेत निकालने के लगातार आरोपों के बीच कुछ एक अपवाद को छोड़ दें तो रेत माफियाओं के बजाय कुछ ट्रकों पर कभी कागजी कार्यवाही की गई या फिर कार्रवाई का दिखावा भी किया जाता रहा है. पर ढाक के तीन पात !  
सालों से इन्वेसटर्स के लिए पलक पांवड़े बिछाने वाली सरकार को रेत के धंधे से जुड़े  कुछ बदनाम, नामी कंपनियों से क्या भरोसा उठ गया या कोई मजबूरी जो 24 मई को सी एम हाउस के भीड़ भरे भव्य पंडाल से सी एम साहब ने गांवों के बेरोजगारों और सहायता समूहों के हाथों से रेत खुदवाने की लोक लुभावन घोषणा कर दी.
लो अब इन युवाओं को भी रेत के धंधे मे उतारने की तैयारी वो भी सख्त शर्तों पर… वाह मामा ! तो क्या आपने उन नामी कंपनियों को मशीन से खोदने का लाइसेंस कब दे दिया था  ? वो खोदे मशीन से और हम खोदें हाथ से…
रेत और नर्मदा नदी से जुड़े  आनन फानन मे और धडा़धड़ लिए जा रहे ऐसे फैसले के पीछे सी एम साहब कारण भी बता रहे हैं, पर हजम किसी को नही हो रहा.
रेत के वैध-अवैध खनन से जुड़ी यही कंपनियां  सरकार को अब क्या माफिया और खलनायक लगने लग गये. रेत के धंधे मे सरकार के उतरने और गांव के लोगों को ही बिना मशीन यानि हाथ से रेत निकालने जैसे ताजा घोषणा तो इसी ओर संकेत करते हैं. कुछ लोग सरकार के इन फैसले को माफियाओं के लिए बड़ा सख्त ! तो कुछ लोग  साहसिक कदम बता रहे हैं और जानना भी चाहते हैं, कि अगर कारण जो बताए जा रहे हैं वो सच है तो आखिर ऊंट पहाड़ के नीचे आया कैसे ? मीडिया (नेशनल) मे लगातार होती फजीहत क्या ये मोदी के अमरकंटक उवाच का असर है. मीडिया (राष्ट्रीय) की खबरों मे लगातार हो रही सरकार की फजीहत, एन जी टी का दबाव या विपक्ष का पोल-खोल या फिर हाल ही मे स्वयं भू नर्मदा पुत्र, सत्ताधारी पार्टी के एक नेता के नर्मदा प्रेम या प्रेम के प्रदर्शन का असर !
पर कौन जाने सच…! 
बहुत लोग आखरी दावे को ताबूत का कील बता रहे.  भगवान जाने!
पर इस प्रतिबंध का दूसरा और महत्वपूर्ण पहलू है प्रदेश मे पत्थर से रेत बनाने का नया रास्ता,प्रोत्साहनके लिए रायल्टी के साथ दूसरे कई छूट. कुछ राज्यों में, जहां नदियों की कमी है वहाँ ये माड्यूल पहले से अपनाई गई है.
पर सवाल है पत्थर से रेत बनाएगा कौन, और इन रियायतों भरे तोहफे का पिटारा किसके लिए ? क्या उन्ही लोगों के, जो राज्य की नदियों की कोख से रेत निकालने का माफिया राज चला रहे हैं या कोई और नये संगठित खिलाड़ी या कुछ अपने लोग. क्योंकि चट्टानों को पिसाई कर रेत बनाना किसी ऐरे-गैरे, बेरोजगार, इंजीनियर, पंचायत वगैरह तो कर नही पाएंगे. नदियों से शुरू  की गई  इस संगठित गिरोहों का अब पूरे प्रदेश के पहाड़, जंगल और जमीन पर अघोषित कब्जा तय है.  जीवन दायिनी नदियों से निकल कर ये ‘पोकलैन’ पहाड़ों को रौंदने तैयार है.
बंद कुछ नही हुआ. बस दिशा बदल गई है… नदियों से ये लुटेरे पहाड़ों की ओर बढ़ चले हैं…अपनी फौज से कह रहे हैं,
आक्रमण..!
लेखक- होमेन्द्र देशमुख,विडियो जर्नलिस्ट एबीपी न्यूज़
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