Category Archives: लेख

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फिर एक मोड़ पर प्रेस की आजादी!

भारत में प्रेस की आजादी के सवाल को लेकर दो घटनाएं चर्चाओं में हैं। एक गंभीर चिंता में डालने वाली,दूसरी उम्मीदों की लौ को बचाए रखने वाली। इन दोनों को लेकर शुरू हुआ विमर्श भारत में आजाद प्रेस के भविष्य को लेकर निश्चित ही कोई न कोई तस्वीर रेखांकित करेगा मैं ऐसा मानकर चल रहा […]

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काश ये हादसा इस धरती पर आखिरी हो…

सुबह सुबह भोपाल से भागकर आये तो हम आरएसएस की बैठक के लिये उज्जैन थे, आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के भाषण के बाद हमें दोपहर तक वापस लौटना भी था, मगर शाम तक बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह के आने की खबर से रूक भी गये पर इधर अमित शाह उज्जैन की सीमा में पहुंचें ही […]

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गुजरात चुनाव का ऊँट किस करवट बैठता है!

यूं तो गुजरात आना हमेशा ही अच्छा लगता है मगर चुनाव के मौके पर गुजरात को देखना अलग अनुभव होता है। वजह है यहां के लोगों की तासीर। आम दिनों में कारोबारी फितरत वाले गुजराती लोग काम धंधे, खाने पीने में ही मगन रहते हैं राजनीति की बहुत ज्यादा परवाह वो नहीं करते। कौन पंतप्रधान […]

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डगर कठिन है इस बार गुजरात में बीजेपी की

वो राजपीपला शहर का महाराजा राजेंद्र सिंह जी विद्यालय था जहां से मतदान के शुरूआती घंटे में वोट डालकर निकल रहे लोगों में से मैंने एक दंपति को घेर लिया। मुस्कुराते हुये केम छो से बात आगे बढी और फिर मैं अपने काम की बात पर आ गया। क्या बदलाव आ रहा है इस बार […]

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शिवराज सरकार की घंटी बजी, तो मंत्री जी के खड़े हुए कान

एबीपी न्यूज के घंटी बजाओ का असर है कि आजकल वाटस अप पर आने वाले संदेशों में सरकारी योजनाओं में हो रही लापरवाहियों की जानकारियां ज्यादा आने लगीं हैं। ऐसा ही एक संदेश पीएम आवास योजना में बालाघाट जिले में हो रहे फर्जीवाडे का आया था। पहले तो वाटसअप की विश्वसनीयता पर संदेह हुआ मगर […]

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बारह वर्ष, तीन कालखंड और एक शिवराज

लेखक- अजय बोकिल मध्यप्रदेश के मुख्यामंत्री के रूप में शिवराजसिंह चौहान के अविकल 12 साल इस बात की पावती हैं कि उनमे राजनेता और लोकनेता का अद्भुत समन्वय है। लोगों से संवाद का कौशल है तो अपनी त्रुटियों को स्वीकार कर उन्हें सुधारने का माददा भी है। अगर कालावधि की ही बात करें तो शिवराज […]

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व्यापमं विशेष: सपनों के हत्यारे !

लेखक- विजय मनोहर तिवारी मध्यप्रदेश में व्यापमं महाघोटाला सरकार, समाज, शिक्षा के कारोबारियों और दलालों की संगठित अपराध श्रृंखला का दूसरा नाम है। एक ऐसा सामूहिक कुकर्म, जिसने हजारों काबिल युवाओं के सपनों की लगातार हत्या की। एक पीढ़ी बरबाद कर दी। इस पाप में हर वर्ण और हर वर्ग के ऊंची पसंद वाले ऊंचे […]

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सरपंच जी खनिज खदानें ले लो…वोट दे दो…!

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने दो साल बाद फिर खनन नीति-2015 में बदलाव करते हुए नयी रेत खनन नीति 2017 का ऐलान किया है। पहले नदियों, खदानों का तेल (रेत ) ठेकेदार निकाल रहे थे, अब नयी नीति में नदियों से रेत या कहो नदियों का तेल निकालने का काम सरपंच भी करेंगे। ग्राम पंचायतें […]

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स्कूल के बच्चे हत्यारे तो हम आप भी नहीं है दूध के धुले

गुरूग्राम के रायन इंटरनेशनल स्कूल में हुये प्रद्युम्न मर्डर केस ने उन मां बाप की नींद उडा दी थी जो अपने बच्चों को स्कूल की बस में चढाकर चैन से हो जाते हैं। स्कूल के अंदर ही हुये इस मर्डर ने जितना दहलाया उससे ज्यादा तो चौंकाया इस खबर ने कि हत्यारा बस कंडक्टर अशोक […]

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छात्र संघ चुनाव या औपचारिकता

लेखक- खुमेन्द्र कुमार,सुबह सवेरे आज राजधानी भोपाल के एमवीएम, एमएलबी, हमीदिया, नूतन कॉलेजों में छात्रसंघ चुनावों को देखा। कॉलेज कैंपसों में पुलिस का काफी पहरा था। अंदर काफी खामोशी थी। अधिकतर जगह पर चुनाव कम फॉर्मेलिटी पूरी करने जैसा ज्यादा दिखाई दे रहा था। जैसे ही गेट पर पहुंचा फौरन पूछा आप कौन? हमने कहा […]

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