Category Archives: लेख

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आरक्षण पर ववाल क्यों : यह गुस्सा नहीं जातिवाद का दंभ है

– सुमित कुमार, युवा पत्रकार आजकल एक हवा चल रही है, आरक्षण के विरोध का. इस हवा के रुख को समझने की जरुरत है, इस हवा से जातिवाद की इतनी दुर्गन्ध आ रही की अब इसे झेल पाना मेरे लिए या हर उस व्यक्ति के लिए जो जातिवाद के दुर्गन्ध को पसंद नहीं करते उनके […]

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शिवराज और मोदी के मंत्रियों के क्षेत्र में कैसे हुई हिंसा !

-ब्रजेश राजपूत, एबीपी न्यूज दृश्य एक: ग्वालियर के थाटीपुर का गल्ला कोठार की हरि केटर्स वाली गली। एक दिन पहले हुये उपद्रव निशान हर ओर मौजूद थे। टूटे कांच और हर ओर बिखरे पत्थर गवाही दे रहे थे कि उस दिन जमकर उपद्रव हुआ होगा। गली के मोड पर ही लगा था हरि केटर्स का […]

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इनके ही लहू से सियासत सुर्ख दिखती है…

– जयराम शुक्ल, वरिष्ठ पत्रकार,लेखक “सड़कों पर बिछी लाशें, बहते खून,जलती बसें और दुकानों की आँच से इस मौसमी तपिश में भी उन कलफदारों के कलेजे में ठंडक पहुँच रही होगी जो इस बात पर यकीन करते हैं कि सड़कों पर बहने वाले लहू से ही सियासत और सुर्ख होती है” भारत बंद के दरम्यान […]

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हमसे ज्यादा ग़ुलाम कोई नही है!

– आईना,युवा पत्रकार “यदि भारत को समुद्र मान लिया जाए तो पत्रकार उसमे पलने वाली वो निरीह मछलियाँ है जिनके लिए अपराधी समुद्र में बैठा मगरमच्छ है तो प्रशासन वो मछुवारा है जो जाल लेकर समुद्र किनारे बैठा ही रहता है। ……पत्रकार जाए तो कहां ? ….अब कोई धार्मिक गुंडा कुछ नही बोलेगा..न हरे की […]

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सब कुछ लाना टमाटर नहीं लाना, टमाटर को पाकिस्तान से भी जूत्ता पडा है !

– ब्रजेश राजपूत, एबीपी न्यूज़ टेलीविजन की कुछ कहानियां एकदम मौसमी हो गयीं हैं. यानिकी पिछली बार मौसम आया था तो वही हुआ जो अब हो रहा है. ये मौसमी कहानियां अगर किसानों से जुडीं हों तो बहुत दुख भी होता था. ये सोच कर कि पिछली बार भी यही दर्द भरी कहानी की थी […]

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एक कपूत, कायर प्रेमी और भगोड़ा पति

–विजय मनोहर तिवारी,वरिष्ठ पत्रकार एक अनारकली मर गई। अकबर ने उसे दीवार में नहीं चुनवाया। धोखेबाज साला सलीम ही निकला। अब वह किस बादशाह से भिड़ती। बेचारी खुद ही चल बसी। प्रीति के मामले में साहब, पद्मिनी की किस्मत में राणा रतनसिंह की जगह खिलजी ही लिखे हुए थे। उसे तो जौहर करना ही था… […]

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लेकिन, आम भारतीय क्या करे?

– भूपेंद्र सिंह बामरा अभी गोवा के मुख्यमंत्री मनोहर पारी्कर साहब और हिन्दी फिल्मों के अभिनेता इरफान खान बीमार हुए और भारत मे पर्याप्त ईलाज न होने के कारण विदेश रवाना हो गये, इनमें से एक हिन्दू है तो दूसरा मुस्लिम। भारत में न मन्दिरों की कमी है और न ही मस्जिदों की। दुनिया के […]

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जब संत व्यापारी हो जाए तो सवाल उठेंगे ही

– अनिल द्विवेदी, लेखक स्वतंत्र टिप्पणीकार योग गुरू बाबा रामदेव जी पर मेरी गहरी आस्था है इसलिए नही कि वे हिन्दु—संत हैं, गोयाकि देश—दुनिया में भारतीय योग और स्वदेशी का ब्राण्ड बन चुके हैं. बाजार पतंजलि के उत्पादों से इस कदर भर गया है कि हिंदुस्तान लिवर जैसी कंपनियों के छकके छूट गए हैं। बाबा […]

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सत्यदेव और रामपाल

– विजय मनोहर तिवारी, वरिष्ठ पत्रकार सत्यदेव और रामपाल। इन नामों से ऐसा लगता है कि चौथी-पांचवी सदी के किसी संस्कृत नाटक के दो पात्र होंगे। बड़े गरिमामय नाम हैं। मगर अक्सर नाम का आपकी बाकी चीजों से कोई तारतम्य होता नहीं है। ये दो नाम मध्यप्रदेश की दो बड़ी सियासी हस्तियों के हैं। सत्यदेव […]

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तेरा मीडिया मेरा मीडिया इसका मीडिया उसका मीडिया

– ब्रजेश राजपूत, विशेष संवाददाता एबीपी न्यूज   मौका था मध्यप्रदेश विधानसभा में प्रश्नकाल का और मीडिया को दिये गये विज्ञापनों से लेकर पूछे गये एक सवाल के जबाव में बहस की दिशा ही बदल गयी। एक तरफ थे कांग्रेस विधायक जीतू पटवारी तो दूसरी तरफ थे संसदीय कार्य और जनसंपर्क मंत्री नरोत्तम मिश्रा। बहस […]

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