माखनलाल विश्वविद्यालय, ज़ीरो ईयर की बात झूठी ! एक विशेष वर्ग में घबराहट…

भोपाल: मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल के माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय में नए निजाम के साथ विश्वविद्यालय में गुणवत्ता के लिए परिवर्तन का दौर चालू क्या हुआ, एक विशेष वर्ग में घबराहट फैल गई।

पत्रकारिता विश्वविद्यालय में पिछले दशकों के दौरान जिस तरह से विस्तार और अंधाधुंध कोर्स चला कर आमदनी बढ़ाने के लिए छात्रों के साथ छल-कपट किया गया उसके कारण स्थिति यह बनी की उसके भोपाल केंपस मे मुश्किल से 25 कक्षाओं में 1100 छात्रों की क्लासेज लगाना चालू कर दिया गया।

कुछ पाठ्यक्रमों में जिनमें बच्चे 12वीं के बाद एडमिशन लेते हैं वहां तो इतनी हड़बड़ी में प्रवेश दे दिया गया कि अगले सेमेस्टर का सिलेबस तक तैयार नहीं कराया गया। छात्रों के भविष्य के साथ ऐसा खिलवाड़ दुनिया मे कहीं नही हुआ होगा। बिना सिलेबस के एडमिशन।

जब नए कुलपति दीपक तिवारी को इस बारे में बताया गया तो उन्होंने गंभीरता से लेते हुए सभी स्नातक पाठ्यक्रमों में की गई हड़बड़ी की जांच करवाई। इसके बाद स्नातक पाठ्यक्रमों को फिर से जब तक तैयार नही कर लिया जाता एडमिशन नही लेने का निर्णय किया गया।

एक विशेष विचारधारा को केंद्र में रखकर पत्रकारिता के विद्यार्थियों के लिए एक तरफा सिलेबस और पढ़ाई के कारण आलोचना झेल रहे विश्वविद्यालय में नए सिलेबस निर्माण का कार्य जब आरंभ हुआ तो पता चला की केवल विश्वविद्यालय के फ्लैगशिप प्रोग्राम जिनके लिए विश्वविद्यालय बना है केवल वही जुलाई के पहले सुधारे जा सकते हैं।

विश्वविद्यालय को अपने नये कैंपस विशनखेड़ी में इस वर्ष स्थानांतरित होना है जिसके कारण पूरे शिक्षक-कर्मचारी उस प्रक्रिया में अपने आप को व्यस्त पाएंगे, ऐसे में स्कूल से निकलने वाले बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ ना करने का निर्णय सभी विभागों के विभागाध्यक्ष ने किया।

विश्वविद्यालय के सभी प्रोफेसरों का मानना रहा है कि पत्रकारिता की पढ़ाई एक व्यावहारिक पढ़ाई है जिसे पढ़ने के लिए बच्चों को एक विस्तृत पाठ्यक्रम की आवश्यकता है । इस पाठ्यक्रम में विद्यार्थियों को हिंदी, अंग्रेजी के ज्ञान के अलावा इतिहास, समाजशास्त्र, अर्थशास्त्र, राजनीति शास्त्र एवं अन्य आधारभूत विषयों का ज्ञान होना आवश्यक है।

आज विश्वविद्यालय में इन आधारभूत विषयों का एक भी शिक्षक नहीं है, आश्चर्य इस बात का है कि बिना इस तरह की जानकारी दिए बच्चों को पत्रकारिता की पढ़ाई करवाई जा रही थी।

नए कुलपति जो स्वयं पत्रकार हैं उन्होंने इस दिशा में कार्य करने हेतु विश्वविद्यालय में गुणवत्ता को लेकर नई मुहिम चलाई है इस दिशा में सिलेबस का पुनर्निर्माण प्रथम चरण है।

कुलपति का मानना है कि विश्वविद्यालय को केवल आमदनी बढ़ाने के लिए ऐसे पाठ्यक्रम तब तक नहीं चलाना चाहिए जब तक विद्यार्थियों को ठीक से बैठाने की व्यवस्था ना हो जाए और विश्वविद्यालय में सभी विषयों के शिक्षक नियुक्त ना हो जाए।

इस साल सत्र 2019-20 मैं विश्वविद्यालय अपने प्रमुख कोर्स जैसे मास्टर आफ जर्नलिज्म, मास्टर ऑफ़ मास कम्युनिकेशन, मास्टर आफ इलेक्ट्रॉनिक मीडिया, मास्टर आफ पब्लिक रिलेशन, मास्टर ऑफ मीडिया मैनेजमेंट, मास्टर आफ न्यू मीडिया टेक्नोलॉजी, फिल्म प्रोडक्शन और कम्प्यूटर विभाग के सभी पाठ्यक्रम यथावत चलाएगा।

अगले सत्र में पूरे सिलेबस को तैयार करने के बाद फिर से स्नातक पाठ्क्रम चलाये जाएंगे। विश्वविद्यालय ने निर्णय लिया है कि कम्प्यूटर विभाग के सभी कोर्सेज पूर्व की तरह चलेंगे। स्कूल से हाल में बाहर निकले बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ ना करने के इस निर्णय का बुद्धिजीवियों ने स्वागत किया है।

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