देश के पूर्व वित्तमंत्री ने खुले में रात क्यों गुजारी !

आज जब एक अखबार के व्यापार पेज पर पढा कि देश का विदेशी मुद्रा भंडार 420 अरब डालर के रिकार्ड स्तर पर आ गया है तो मुझे यशवंत सिन्हा याद आ गये। आप सोंचेंगे भला यहां कैसे बीजेपी के एक पुराने हासिये पर पडे नेता की याद आ गयी। तो आपको बता दूं कि नरसिंहपुर में चल रहे किसानों के धरने पर जब एक तारीख को बीजेपी नेता यशवंत सिन्हा पहुंचे तो मुझे भी हैरानी हुयी थी फिर सोचा कि बडे नेता हैं, दो बार के वित्तमंत्री एक बार के विदेश मंत्री भारतीय प्रशासनिक सेवा के पूर्व अधिकारी रहे हैं तो अपना समर्थन किसानों को देकर एक दो फोटो खिचवाकर और टीवी कैमरों पर बाइट देकर रवाना हो जायेंगे। मगर रात होते होते उनकी जो तस्वीरें और वीडियो हमारे अतुल ने भेजी तो देखकर दंग रह गया। सिन्हा जी ने धरना स्थल पर ही रात गुजारने का फैसला किया था सिर पर चारों तरफ सफेद शाल को मफलर के अंदाज में लपेट कर उस पर चारों तरफ से गुलाबी कंबल डाल वो तख्त पर बैठकर कागज की थाली में रात का खाना खा रहे हैं, सिन्हा साहब की जिद यही नहीं रूकी कडाके की सर्दी वाली रात में भी वो बिना तंबू के खुले में उसी तख्त पर लेट कर सो गये जहां धरना चल रहा था।

हांलाकि इस बीच में कलेक्टर एसपी उनसे रेस्ट हाउस में रूकने की मिन्नत करते रहे मगर सिन्हा जी नहीं माने तो नहीं माने। वैसे भी एक लिमिट से ज्यादा मानने की उनकी फितरत नहीं है तभी तो अच्छी खासी आइएएस की 24 साल की नौकरी छोडकर राजनीति में आ गये। पटना में जयप्रकाश नारायण के आंदोलन से जुडे रहे तो पहली पार्टी जनता पार्टी ही चुनी। 1988 में राज्यसभा सदस्य बने और बाद में जनता पार्टी जब जनता दल बनी तो चंद्रशेखर की सरकार में नवंबर 1990 से जून 1991 तक वित्तमंत्री बने। मगर इस दौरान जो चुनौतियां यशवंत सिन्हा ने झेंली वो शायद ही देश के किसी और वित्तमंत्री ने झेलीं होंगीं। और इन्हीं चुनौतियों पर चर्चा करना मेरा मकसद था जब मैं नरसिंहपुर में उनसे चार फरवरी को मिला। नरसिंहपुर के सर्किट हाउस के नर्मदा नाम के कमरे में सिन्हा जी सामने एबीपी न्यूज देखते हुये बेहद खुशगवार मूड में अपने साथी सांसद शत्रुध्न सिन्हा का इंतजार कर रहे थे जो किसानों की इस लडाई में उनका साथ देने मुंबई से आ गये थे। मैंने मौका मिलते ही ताना मारा सर आपने गजब दुस्साहस दिखाया आपको डर नहीं लगा कि खुले मैदान में कडाके की ठंड में आप पेड के नीचे तख्त पर ही सो गये। डर तो नहीं हां गुस्सा आ रहा था जिस तरह से प्रशासन इन किसानों से बर्ताब कर रहा था। यदि उनकी बात मानकर यहां कमरे में सोने आ जाता तो फिर मैं यहां आंदोलन करने क्यों आया। मगर उस दिन बहुत ठंड थी और मुझे डर था कि इक्यासी साल की उमर में यदि ठंड शरीर में बैठ गयी तो निमोनिया ही होना था जो इस उमर में लाइलाज होता है मगर प्रभु की कृपा है सब ठीक हुआ।

अब मुझसे और नहीं रहा जा रहा था मैंने कहा सर आप दो बार वित्तमंत्री रहे एक बार चंद्रशेखर जी के साथ तो दूसरी बार अटल जी की सरकार में उस दौरान हम यूनिवरसिटी में पढते थे मगर याद है कि आपके कार्यकाल में देश का सोना विदेश में गिरवी रखा गया था, आपको याद है कि नहीं वो वाकया। सौम्य सिन्हा जी के चेहरे पर स्निग्ध सी मुस्कान कौंधती है वो कहते हैं अरे भला कैसे भूलेंगे मगर समझिये वो कठिन दौर था गल्फ वार के बाद जब आइल महंगा हो गया था और हमारे पास एक हफते का ही फारेन एक्सचेंज बचा था तो भला क्या करते। बहुत सारे सुझाव आये मगर जो सरकार को जमा वो यही कि स्टेट बैंक आफ इंडिया में रखा, तस्करों से पकडे गये करीब बीस टन सोने को हमने लंदन के बैंक आफ इंग्लैंड भेजा जिससे हमें 500 मिलियन डालर कर्जा मिला। इससे मिली विदेशी मुद्रा के दम पर हम उस आर्थिक संकट से निपटे। मगर आपने ये सोना लंदन भेजा कैसे। ये मेरा मासूम सा सवाल था तो सिन्हा जी मुस्कुराये अरे भाई एयर लिफट कराया गया सोना और इस दौरान तुम्हारे जेसे मुंबई के एक पत्रकार शंकर अययर ने वो खबर ब्रेक कर दी। हमारे इस कदम की खूब आलोचना हुयी मगर बाद में सबको समझ में आया कि दीवालिया हो रहे देश को संकट से बचाने का यही एक कदम था। चंद्रशेखर सरकार के बाद बनी नरसिंह राव सरकार ने भी एक बार सोना रखकर विदेशी मुद्रा ली थी मगर ये तात्कालिक कदम था अब तो देश इन संकटों से बाहर आ गया है। आप जानते हो देश में विदेशी मुद्रा का भंडार अब रिकार्ड स्तर पर पहुंचने वाला है। इस बातचीत के पांच दिन बाद अखबार के पन्ने पर छपी विदेशी मुद्रा भंडार 420 अरब डालर के रिकार्ड स्तर पहुंचने की खबर सिन्हा जी की बात की पुप्टि कर रही थी।

पुनश्च : ( यशवंत सिन्हा के वित्तमंत्री बनने के पहले संसद में बजट शाम पांच बजे पेश होता था। ये अंग्रेजों के जमाने की परंपरा थी तब लंदन में सुबह के ग्यारह बजते थे। सिन्हा ने इस अंग्रेजी परंपरा को तोडा और पहले दोपहर दो बजे और अब ग्यारह बजे संसद में बजट पेश होता है। )

– ब्रजेश राजपूत,एबीपी न्यूज
( सुबह सवेरे में ग्राउंड रिपोर्ट)

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