अपना-अपना घोटाला….

– सौरभ तिवारी, लेखक (सहायक संपादक ibc24)

अजब नजारा है। घोटाले का बंटवारा चल रहा है। तेरा घोटाला-मेरा घोटाला। इतना घोटाला मेरे हिस्से का,उतना तेरे हिस्से का। इतनी बदनामी मेरी, तो उतनी तेरी। वार पर पलटवार। आरोप पर प्रत्यारोप।

-ये देखो, घोटालेबाज के साथ दावोस में तुम्हारे प्रधानमंत्री की फोटो।
-अच्छा! तो तुम्हारा भावी प्रधानमंत्री ही कौन सा दूध का धुला है। वो भी तो घोटालेबाज के साथ कॉकटेल पार्टी कर चुका है।
-अरे, छोड़ो। घोटाला तो तुम्हारे UPA शासनकाल में शुरू हुआ था, हमने तो पकड़ा है।
– घंटा पकड़ा है? बड़े चौकीदार बनते थे,तो फिर घोटालेबाजों को भाग क्यों जाने दिया?
-अरे! कब तक बच कर रहेंगे? पाताल से भी खोज निकालेंगे।
– चल फेंकू कहीं के। इतने बड़े तीसमार खां होते तो ललित मोदी और विजय माल्या को नहीं पकड़ लाते। दाऊद के बारे में भी तो लंबी-लंबी हांके थे।
– अरे! भाग भले गए, लेकिन शिकंजा तो कस दिया है ना। देख नहीं रहे, ताबड़तोड़ छापेमारी चल रही है। घोटाले की रकम की आधी वसूली तो हो भी गई है।
– मूर्ख! अब छापेमारी से क्या फायदा?तब क्यों नहीं जागे जब PMO,वित्तमंत्रालय, प्रवर्त्तन निदेशालय को सबूत के साथ शिकायत की गई थी?
– चुप! पप्पू के चमचे। शिकायत तो UPA शासनकाल में ही इलाहाबाद बैंक के पूर्व डॉयरेक्टर कर चुके थे। अगर तभी ध्यान दिया जाता तो ये नौबत ही नहीं आती।
– अरे भक्त! FIR तो CBI ने 2017 में दर्ज की थी, ये देखो उसकी कॉपी।
– अरे जा! मालूम है कितने बड़े ईमानदार हो, तुम्हारी तो पूरी UPA सरकार ही घोटालों की सरकार थी।
– अबे चुप। चोर कहीं के।
– अबे चोर किसको बोला? तू चोर, तेरा बाप चोर…।
– @#&%$@#…
– #$&@&^##@$#%@@…।

पैसा हजम-तमाशा खतम। बच्चा लोग बजाओ ताली…।
———————

Please follow and like us:

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Facebook
Facebook
Google+
Twitter
YouTube