हिन्दी विश्वविद्यालय का नाम अटल जी के नाम से रखना सार्थक- जे. नंदकुमार

भोपालः भारतीय संस्कृति में किसी भी नाम का मतलब बिना अर्थ के नहीं होता। उसके पीछे कुछ ना कुछ ऐसा छुपा होता है जिससे उस नाम की सार्थकता परिलक्षित होती है, यही हमारे ज्ञान को दर्शाता है। यह कहना है प्रज्ञा प्रवाह के राष्ट्रीय संयोजक जे.नंदकुमार का। अटल बिहारी वाजपेयी हिंदी विश्वविद्यालय के समापन समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में पहुंचे जे. नंदकुमार ने भारतीय संस्कृति, वेदों और उससे उपजे विज्ञान के विषय में उद्बोधन दिया। भारतीय ज्ञान संपदा  समसामायिक वैश्विक समस्याओं का समाधान पर बोलते हुए उन्होंने यह बात कही। जे. नंदकुमार ने अपने उद्बोधन में हिंदी विश्वविद्यालय का नाम अटल जी के नाम से रखने को लेकर अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि अटल जी एक ऐसा व्यक्तित्व है जिन्होंने संयुक्त राष्ट्र संघ में विदेश मंत्री रहते हुए हिंदी में भाषण देकर इस भाषा को और समृद्ध बनाया था। इसलिए विश्वविद्यालय का नाम अटल बिहारी वाजपेयी हिंदी विश्वविद्यालय होना इसके नाम को सार्थक करता है। क्योंकि भारत ज्ञान की भूमि है, जहां ज्ञान को परम स्थान है। हिंदी विश्वविद्यालय को यह नाम देना राजनीतिक नहीं बल्कि यह ज्ञान की सोच है।
इस अवसर पर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो.रामदेव भारद्वाज ने भी अपने उद्बोधन में भारतीय मनीषियों और ऋ षि परंपरा के बारे में विद्यार्थियों को बताया। उन्होंने विषय प्रवर्तन की जानकारी देते हुए कहा कि जीवन के हितार्थ जितने भी साधन है वे भारतीय ज्ञान परंपरा और वांग्मय में ही मिलते हैं। संपूर्ण विश्व को भारतीय परंपरा ने जो दिया है उस पर चिंतन आवश्यक है। सभी समस्याओं का समाधान भारत के पास है। भारत रत्न पंडित अटल बिहारी वाजपेयी के जन्मोत्सव और हिंदी विश्वविद्यालय के सातवें स्थापना दिवस के मौके पर आयोजित कार्यक्रम में जहां विश्वविद्यालय के छात्र-छात्राओं ने विभिन्न प्रतियोगिताओं में हिस्सेदारी की तो वहीं अटल जी के जीवन के बारे में भी वाद-विवाद, भाषण, कविता, संगीत, रंगोली के माध्यम से भारतीय परंपरा और हिंदी भाषा के अधिक से अधिक उपयोग को लेकर इस दौरान परिचर्चा हुई।
भारतीय उपमहाद्वीप में सबसे अधिक बोली जाने वाली हिंदी भाषा को लेकर इस दौरान विश्वविद्यालय ने जो कदम पिछले सात सालों में उठाए हैं उसे लेकर अपर मुख्य सचिव, उच्च शिक्षा विभाग ने भूरी-भूरी प्रशंसा की तो, वहीं विश्वविद्यालय के द्वारा चलाए जा रहे हिंदी के पाठ्यक्रमों को लेकर उद्देश्यों की प्राप्ति के लिए मंथन पर जोर दिया। इस मौके पर विभिन्न आयोजित प्रतियोगिताओं के प्रतिभागियों को पुरस्कृत किया गया। कार्यक्रम के अंत में विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ. सुनील पारे ने सभी के प्रतिआभार व्यक्त किया। इस दौरान विश्वविद्यालय के नए भवन में बनाई गई नक्षत्र वाटिका का भी विधिवत पूजन कर मुख्य अतिथियों ने उद्घाटन किया। हिंदी विश्वविद्यालय के स्थापना दिवस समारोह में बरकतउल्लाह विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. प्रमोद के. वर्मा, भोज विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. रविन्द्र कान्हरे, राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. सुनील कुमार गुप्ता, निजी विश्वविद्यालय विनियामक आयोग के अध्यक्ष प्रो. अखिलेश पाण्डे सहित वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. देवेन्द्र दीपक, कैलाशचंद्र पंत आदि गणमान्य नागरिक एवं  विश्वविद्यालय के सभी कर्मचारी, अधिकारी, शिक्षकगण और विद्यार्थी उपस्थित रहे।

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