सिंधिया का किसान के बाद कुपोषण आंदोलन

भोपाल: मध्य प्रदेश में कुपोषण को लेकर सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया ने केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री मेनका गाँधी को पत्र लिखाकर प्रदेश में कुपोषण की समस्या को लेकर एक बार फिर अवगत करवाया है।

इसे लेकर किसान आंदोलन के चलते बैकफुट पर आई शिवराज सरकार की मुश्किलें आने वाले दिनों में और बढ़ती दिख रही है। सिंधिया ने प्रदेश में कुपोषण को लेकर केंद्रीय मंत्री को लिखे खत में अपने पिछले चार पत्रो की भी याद दिलाई है जिसमे उन्होंने केंद्रीय जांच दल प्रदेश में कुपोषण की स्थिति जानने के लिए भेजने का जिक्र किया है।

सिंधिया ने अपने पत्र में  लिखा है कि मैंने मध्यप्रदेश के श्योपुर जिले में कुपोषण की भयावह समस्या का उल्लेख अपने 4 पत्रों में किया था। जिसके कारण 2 महीनों में 19 बच्चों की मृत्यु हुई। इस पत्र में मैंने आपसे उच्चस्तरीय केन्द्रीय जांच दल द्वारा जांच कराने का आग्रह किया था, जिसके आधार पर समस्या के शीघ्र निराकरण के साथ दोषी अफसरों के खिलाफ सख्त कार्यवाही की जा सके।

पिछले पत्रों में सिंधिया ने मेनका गांधी को दिए गए सुझावों का भी जिक्र किया,जैसे की सर्वोत्तम स्वास्थ्य सुविधाओं का प्रबंधन,संतुलित आहार के पैकेट का वितरण,प्रदेश में व्यापक स्तर पर चल रहे आंगनवाड़ी एवं पोषण आहार घोटालों की जांच, इत्यादि। इस पर मेनका गाँधी ने गहरी संवेदना व्यक्त करते हुए आश्वस्त किया था कि वे मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री को पत्र लिखेंगी,केन्द्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्रालय की ओर से एक स्वतंत्र जांच दल भेजेंगी और दोषिओं पर सख्त कार्यवाही करेंगी।जबकि इस तरफ ध्यान न देने से सितम्बर 2016 में 19 बच्चों की मौत के बाद भी कोई कार्यवाही न किये जाने का ही परिणाम था कि मात्र 2 महीनों में कुपोषित बच्चों की संख्या 1740 और बढ़ गयी।अक्टूबर 2016 तक श्योपुर में जहाँ कुपोषित बच्चों की संख्या 22708 थी,वही दिसंबर तक इनकी संख्या बढ़कर 24448 हो गयी। इस पर हाई कोर्ट ग्वालियर बेंच ने 18 जनवरी को सख्त आदेश जारी करते हुए कहा था कि कुपोषण के कारण एक भी मौत हुई तो कलेक्टर और महिला एवं बाल विकास अधिकारी पर कार्यवाही होगी मगर इसके उपरांत भी राज्य सरकार के अधिकारियों द्वारा ठीक से कार्यान्वन और निगरानी न किये जाने का ही परिणाम है कि स्थिति बद से बद्दतर होती जा रही है।

सिंधिया ने खेद के साथ कहा कि मेरे उपरोक्त पत्रों और आपसे व्यक्तिगत वार्तालाप के 9 महीनों बाद भी परिस्थितियों में रत्तीभर भी सुधार नहीं आया है तथा कुपोषण के कारण दिन प्रतिदिन मासूम बच्चों की जानें जा रही है। राज्य सरकार के आंकड़ों के मुताबिक़ 2016 में 6 साल से कम उम्र के 25440 बच्चों ने अपनी जाने गंवाई (64बच्चे प्रतिदिन), हालांकि राज्य स्वास्थ्य विभाग के अनुसार इनमें से मात्र 116 मौतें की कुपोषण के कारण हुई, वहीं दूसरी ओर राज्य की महिला एवं बाल विकास मंत्री ने दावा किया है कि इनमें से एक भी मौत कुपोषण के कारण नहीं हुई। 22 जून को लिखे गए पत्र को लेकर सिंधिया ने उम्मीद की है कि विषय की गंभीरता को समझते हुए मेनका गाँधी इस पर प्राथमिकता से गौर करेंगी और की गयी कार्यवाही से उन्हें अवगत करवाएंगी।

कुल मिलाकर सिंधिया मध्य प्रदेश में किसान आंदोलन की बात हो या फिर कुपोषण को लेकर प्रदेश की तरफ सबका ध्यान आकर्षित करने का मामला हो वह छोड़ नहीं रहे। जबकि प्रदेश कांग्रेस सिंधिया के किसान आंदोलन को लेकर काफी उत्साह की मुद्रा में है और सत्याग्रह में उमड़ी भीड़ ने एक बार फिर कांग्रेस को पंख दे दिए है। वही मेनका गांधी को कुपोषण पर एक बार फिर पत्र लिखकर सिंधिया ने अपने इरादे एक बार फिर जाहिर कर दिए है.

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