रमन सिंह ने अनुसूचित जाति के लिए खोला खज़ाना, प्रधिकरण की बैठक में कई अहम निर्णय

रायपुरः मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने कहा है कि राज्य के सभी 633 भवन विहीन छात्रावासों और आश्रम शालाओं के लिए लगभग 1049 करोड़ रूपए की लागत से भवनों का निर्माण युद्धस्तर पर किया जाएगा। इसके लिए राष्ट्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) और जिला खनिज न्यास निधि (डीएमएफ) सहित अन्य मदों से राशि की व्यवस्था की जा रही है। डॉ. सिंह ने आज शाम यहां विधानसभा परिसर स्थित नवीन समिति कक्ष में अनुसूचित जाति विकास प्राधिकरण की 22वीं बैठक में यह जानकारी दी।
डॉ. सिंह की अध्यक्षता में बैठक में प्राधिकरण की राशि से विभिन्न जिलों में स्वीकृत और निर्माणाधीन कार्यों की विस्तृत समीक्षा की गई। सदस्यों ने अनुसूचित जाति और जनजाति वर्ग के 27 समुदायों के नामों में उच्चारण विभेद को मान्य करने के ऐतिहासिक फैसले के लिए और विगत राज्योत्सव 2017 में राष्ट्रपति श्री रामनाथ कोविंद गिरौदपुरी धाम आमंत्रित कर उनके हाथों विशाल सामुदायिक भवन का शिलान्यास करवाने के लिए मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह के प्रति आभार प्रकट किया। सदस्यों ने इसके लिए मुख्यमंत्री का अभिनंदन भी किया। प्राधिकरण के सदस्यों ने कहा कि अनुसूचित जनजाति के 22 और अनुसूचित जाति वर्ग के पांच समुदायों के जातिगत नामों में वर्तनी और उच्चारण संबंधी विभेदों को मान्य करने पर जाति प्रमाण पत्र बनवाना बहुत आसान हो गया है। इससे लाखों लोगों को और विशेष रूप से छात्र-छात्राओं को काफी राहत मिली है।
बैठक में बताया गया कि वर्ष 2004 में गठित इस प्राधिकरण की विभिन्न बैठकों में जनप्रतिनिधियों से प्राप्त प्रस्तावों के आधार पर  अब तक 444 करोड़ 85 लाख रूपए के ग्यारह हजार 364 निर्माण और विकास कार्य मंजूर किए जा चुके हैं। इनमें से अब तक दस हजार 650 कार्य पूर्ण कर लिए गए हैं। प्राधिकरण की बैठकों में प्रारंभ से अब तक 93 महत्वपूर्ण और नीतिगत निर्णय लिए गए। इनमें से 86 निर्णयों का अमल पूर्ण कर लिया गया है। प्राधिकरण की राशि से मिनी माता स्वावलंबन योजना के तहत एक हजार 920 युवाओं को स्व-रोजगार और प्रशिक्षण सहायता देने के लिए 27 करोड़ 88 लाख रूपए मंजूर किए गए। इसी कड़ी में प्राधिकरण की स्थापना से अब तक तीन हजार 788 किसानों के सिंचाई पम्पों को बिजली का कनेक्शन देने के लिए 25 करोड़ 64 लाख रूपए स्वीकृत किए गए। इनमें से तीन हजार 720 सिंचाई पम्पों का विद्युतीकरण किया जा चुका है। मिनी माता स्वावलंबन योजना के तहत चालू वित्तीय वर्ष 2017-18 को मिलाकर विगत तीन वर्षों में 600 युवाओं को स्व-रोजगार स्थापना के लिए दस करोड़ 62 लाख रूपए की धनराशि मंजूर की गई। इस राशि से उनके लिए दुकानों का निर्माण किया गया। इनमें से वर्ष 2015-16 में 216, वर्ष 2016-17 में 30 हितग्राहियों ने स्वयं का व्यवसाय शुरू कर दिया है। मुख्यमंत्री ने जनप्रतिनिधियों से प्राधिकरण क्षेत्र में आवश्यक निर्माण कार्यों के प्रस्ताव जल्द से जल्द भेजने का अनुरोध किया। उन्होंने कहा कि ये प्रस्ताव अगले 15 दिनों के भीतर दे दिए जाएं, ताकि उन्हें प्राधिकरण के बजट में शामिल किया जा सके।

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