मध्यप्रदेश में कांति, झाबुआ-रतलाम लोकसभा में कांग्रेस विजयी

match1_1448353174भोपालः मध्यप्रदेश के झाबुआ-रतलाम लोकसभा सीट पर हुए उपचुनाव में एक बार फिर कांग्रेस का कब्जा हो गया है. यहाँ से पिछले लोकसभा चुनाव में बीजेपी के हाथों पराजय छेल चुके कांतिलाल भूरिया ने बीजेपी को हराकर उपचुनाव में जीत हासिल कर ली. 2014 में लोकसभा के आम चुनाव में झाबुआ- रतलाम सीट से बीजेपी प्रत्याशी दिलीप सिंह भूरिया ने कांतिलाल भूरिया को लगभग 1 लॉख वोटों से शिकस्त दी थी.वही असमय हुई दिलीप सिंह भूरिया की मौत के बाद यहाँ उपचुनाव हुए जिसमें कांतिलाल भूरिया पर जनता ने एक बार फिर विश्वास व्यक्त किया. कांतिलाल भूरिया ने अपनी निकटतम प्रत्याशी स्वर्गीय दिलीप सिंह भूरिया की बेटी निर्मला भूरिया को 88878 वोट के मार्जिन से हराया. यहाँ कांग्रेस प्रत्याशी कांतिलाल भूरिया को 5 लाख35 हजार781 वोट मिले तो वही बीजेपी प्रत्याशी निर्मला भूरिया को 4 लॉख 46 हजार 904 वोट जनता ने दिए. कांतिलाल भूरिया की झाबुआ-रतलाम लोकसभा सीट पर हुई इस जीत को कांग्रेस की बडी जीत बताया जा रहा है.

शुरुआती दौर की मतगणना में भाजपा ने बढ़त बना रखी थी, लेकिन आखिरी राउंड तक भाजपा केवल रतलाम शहर में ही सिमटकर रह गई. झाबुआ, आलीराजपुर, सैलाना, जोबट और रतलाम ग्रामीण से कांग्रेस को जमकर वोट मिले. जीत की ओर बढ़ती कांग्रेस को देखते हुए रतलाम सहित भोपाल के कांग्रेस कार्यालय में कार्यकर्ताओं ने जमकर जश्‍न मनाया.  जीत के बाद कांग्रेस का कहना है कि जनता ने सरकार के झूठे वादों को दरकिनार करते हुुए कांतिलाल भूरिया को चुना है.

वही रतलाम-झाबुआ संसदीय सीट को जीतने के लिए भाजपा ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी थी. यहां झाबुआ और आलीराजपुर सहित रतलाम के इलाकों में सीएम शिवराज सिंह ने एक दिन में कई जगह सभाएं की थी. वही इस संसदीय क्षेत्र में कई मंत्री लगातार डेरा डाले रहे. लेकिन बावजूद भी बीजेपी को हार का मुँह देखना पड़ा.congress_1448345740

वही कांतिलाल भूरिया के राजनीति सफर पर नज़र दौडाए तो कांतिलाल भूरिया का जन्म झाबुआ जिले के राणापुर इलाके के ‘मोरडूंडिया’ गांव में हुआ था. उन्होंने झाबुआ महाविद्यालय से 1972 में छात्र राजनीति शुरू की. 1974 में उन्‍होंने कानून की पढ़ाई पूरी की. इसके बाद उनका चयन राज्य प्रशासनिक सेवा के जरिए डीएसपी पद के लिए हुआ था. भूरिया ने नौकरी करने के बजाए राजनीति को अपना करियर चुना. कांतिलाल भूरिया थांदला से 1980 से 1996 तक 5 बार विधायक चुने गए. इस दौरान वे अर्जुन सिंह कैबिनेट मे संसदीय सचिव रहे तो दिग्विजय सरकार मे मध्य प्रदेश के अजाक मंत्री रहे. 1996 में वह पहली बार सांसद चुने गए और लगातार पांच चुनाव में उन्होंने जीत दर्ज की. 2003 में भूरिया को यूपीए-1 में केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री बनाया गया था. यूपीए-2 में उन्हें केंद्रीय ट्राइबल मिनिस्टर बनाया गया. 2011 मे भूरिया को मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी का प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया था लेकिन 2013 का प्रदेश विधानसभा चुनाव हारने के बाद उन्होंने इस्तीफा दे दिया. पिछले लोकसभा चुनाव में मोदी लहर में वे 1.08 लाख से ज्‍यादा वोटों चुनाव हार गए थे.

वही अगर रतलाम-झाबुआ लोकभा सीट पर अभी तक  नज़र दौडाए तो इस संसदीय क्षेत्र का इतिरहास कुछ यू रहा है.

– 1952 अमरसिंह, कांग्रेस

– 1955 अमर सिंह कांग्रेस

– 1962 जमुना देवी, कांग्रेस

– 1967 सूरसिंह, कांग्रेस

– 1971 भागीरथ भंवर, संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी

– 1977 भागीरथ भंवर, भारतीय लोक दल

– 1980 दिलीप सिंह भूरिया, कांग्रेस 1984 दिलीप सिंह भूरिया, कांग्रेस 1989 दिलीप सिंह भूरिया, कांग्रेस 1991 दिलीप सिंह भूरिया, कांग्रेस 1996 दिलीप सिंह भूरिया, कांग्रेस 1998 कांतिलाल भूरिया, कांग्रेस 1999 कांतिलाल भूरिया, कांग्रेस 2004 कांतिलाल भूरिया, कांग्रेस 2009 कांतिलाल भूरिया, भाजपा 2014 दिलीप सिंह भूरिया

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