मध्यप्रदेश जनसंपर्क विभाग बंटा आजाक्स और सपाक्स में, एक अधिकारी इसकी वजह !

भोपालः मध्यप्रदेश जनसंपर्क विभाग इन दिनों जातिवाद का अखाड़ा बना हुआ है. जनसम्पर्क विभाग यूँ तो सरकार का भोंपू तंत्र कहा जाता है, लेकिन आजकल यह भी जातिवाद द्वंद में उलझा हुआ है. मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल स्थित प्रदेश सरकार की उपलब्धियों और योजनाओं को विज्ञापन और प्रचार-प्रसार के माध्यम से जन-जन तक पहुँचाने का जिम्मा जनसंपर्क विभाग का है. लेकिन भारी भ्रष्ट्राचार की गिरफ्त में यह विभाग कुछ खास लोगों को उपकृत करने के लिए भी जाना जाता है.

सूत्रों की माने तो जनसंपर्क विभाग के इतिहास में जाए तो यहाँ एक वर्ग विशेष हावी रहा करता था, लेकिन आज परिदृश्य बदला बदला सा है. प्रमोशन में आरक्षण पर ब्रेक लगने और मुख्यमंत्री द्वारा आरक्षित वर्ग को समर्थन देने के बाद यंहा के सामान्य वर्ग के अधिकारी अब ठगा सा महसूस करने लगे है. एक तो उन्हें प्रमोशन से वंचित होना पड़ रहा है, दूसरी ओर आरक्षित वर्ग के अधिकारियो की बल्ले बल्ले हो रही है.  चाहे प्रशासन हो, फ़िल्म निर्माण हो, लेखा हो, डीडीओ विज्ञापन हो, मंत्रालय में ऊपर से नीचे तक आरक्षित वर्ग का कब्जा हो चुका है. यह आरक्षित वर्ग के अधिकारी कुछ ऐसे अधिकारियों के हाथों खेलते नज़र आते है जो अपने आप को सीएम का खास बताते है और जनसंपर्क विभाग में भ्रष्ट्राचार को भी बढावा दे रहे है. कमीशन के आधार पर पत्र-पत्रिकाओं, बेवसाइड और टीवी चैनलों को विज्ञापन जारी किए जा रहे है. सूत्रों की माने तो यहाँ चेहरे देखकर विज्ञापन दिए जा रहे है.

जिसको लेकर कुछ पत्र-पत्रिकाओं और बेवसाइड संचालक राज्यपाल, सीएम और जनसंपर्क मंत्री से मुलाकात कर जनसंपर्क विभाग में चल रहे भ्रष्ट्राचार के इस गोरखधंधे के दस्तावेज सौंपने की तैयारी कर रहे है. जिसमें राज्य जनसंपर्क विभाग से संभागीय जनसंपर्क कार्यालय में ट्रांसफर हो चुके उस उप संचालक स्तर के अधिकारी के खिलाफ ओडियो-विडियो क्लिप के साथ दस्तावेज पेश किए जाएगें. जिसे जनसंपर्क मंत्री को ठेंगा दिखाते हुए अभी भी शाखा में रखा गया है.

लेकिन बात जनसंपर्क में सपाक्स और अजाक्स की चल रही है जिसको लेकर यहाँ के सामान्य वर्ग के अधिकारी और कर्मचारी सपाक्स के संपर्क में आकर एक जुट हो चुके है. जिसको लेकर एक वाट्सएप ग्रुप भी बना लिया गया है. इस वाट्सएप ग्रुप की कमान माध्यम में आशा की किरण बनकर उभरे और पत्रकारिता विवि के देन एक वरिष्ठ अधिकारी के हाथों में है, जो जनसम्पर्क में आते आते रह गए. कुल मिलाकर जातिवाद का जहर अब जनसंपर्क विभाग में भी फैल चुका है जिसको लेकर दो वर्ग आपस में करो या मरो की स्थिति में आ गए है. आने वाले दिनों में जनसंपर्क विभाग के अधिकारी कर्मचारी धरना देते दिखे यह कोई आश्चर्य की बात नहीं होगी.

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