प्याज खाकर भैसें खुश…कहा शुक्रिया साहब

दृश्य एक – आगर मालवा जिले के मथुरा खेडी में रहते हैं देवी सिंह जिन्होंने आठ बीघा जमीन पर प्याज लगायी थी, बीज खाद और मजदूरी में एक डेढ लाख रूप्ये खर्च करने के बाद प्याज की फसल जब आयी तो घाटा दे गयी। बंपर फसल आने के बाद मंडी में उमडी किसानों की भारी भीड के बीच बेचने के बाद भी नब्बे हजार रूपये ही हाथ आये हैं। यानिकी कमाई लागत से भी कम। ये अलग बात है कि उनके खेत पर शिवराज सरकार की किसान नीतियों के गुणगान करने वाले फलैक्स छांह करने के काम को लगे हैं । आगर में हुये किसान सम्मेलन से लौटते समय वो ये पोस्टर ले आये थे पहले इसे घर पर टांगा था मगर अब ये खेत पर धूप से बचने के काम आ रहे है।
दृश्य दो – धार जिले के राजगढ की मंडी में हर तरफ प्याज ही प्याज बिखरा है। आधे से ज्यादा बुरी तरह भीग गया है। कई प्याज की लाल बोरियां अंकुरित होकर हरी हो गयीं हैं। इन्हीं प्याज के बीच अच्छी प्याज की छटाई कर रहे बच्चे बताते हैं कि दो सौ दिन का रेट पर व्यापारी ने काम पर लगाया है। वहीं दूर खडे नागरिक आपूर्ति निगम के अधिकारी बता रहे हैं कि दस पैसे किलो से लेकर पचास पैसे किलो तक हमारा पूरा प्याज बिक गया। किसी ने बेचने तो किसी ने खाद बनाने प्याज खरीद लिया। वो ये बात इतने गर्व से बता रहे हैं कि हैरानी होती है कि आठ रूपये किलो से खरीदे प्याज को दस पैसे किलो में बेचना समझदारी है या आपराधिक लापरवाही।
दृश्य तीन – भोपाल के बाहर बसे हाईवे पर बसे अरवलिया गाँव में खनिज विभाग की गहरी सी पत्थर की खदान में दिन में चार बार मंडी से उठाकर लायी गयी प्याज डंपर की मदद से डाली जा रही है। सरकारी भापा में कहें तो प्याज विनिष्टिकरण की इस कार्रवाई की निगरानी कर रहे आपूर्ति निगम के अधिकारी कह रहे हैं कि प्याज को डंप करने की ये साइट हमने मेहनत से खोजी है। पहले सैंकडों क्विंटल प्याज डालेंगे फिर उस पर क्लोरीन और फिर मिटटी डाल देंगे इससे बदबू और जानवरों से बची रहेगी ये सडा प्याज। उधर फेंकी गयी प्याज को लगातार खाये जा रहीं चार भूखी भैसें थोडी सी तृप्ति मिलते ही आंखों ही आखों में साहब की तरफ देख उनका शुक्रिया अता कर रहीं थीं जो उन्होंने ये साइट चुनी।
दृश्य चार – आगर मालवा से ढाई सौ किलोमीटर दूर भोपाल के बिटटन मार्केट में सब्जी की दुकान सजा कर बैठे इदरीस मियां पच्चीस रूपये किलो प्याज बेच रहे हैं। कहते हैं प्याज के रेट वैसे तो इन दिनों हर साल बढते हैं मगर इस बार तेजी ज्यादा है और ये तेजी लंबे दिनों तक रहेगी। वजह पूछने पर वो हंसते हुये बताते हैं कि भाई सरकार किसान से प्याज खरीदकर प्याज सडायेगी और जानवरों को खिलायेगी तो फिर भला आप क्यों सस्ता प्याज खाओगे। अरे साहब शिवराज मामा खुश उनके किसान खुश फिर आप मीडिया वाले क्यों परेशान हो रहे हो।
दृश्य पांच-  इसी मंडी में सब्जी खरीद रहीं शिवाजी नगर में रहने वाली रश्मी शुक्ला प्याज के ढेर की तरफ देख कर कहतीं हैं कि अखबारो और टीवी में प्याज की आवक देख हम खुश हो रहे थे कि इस बार सस्ता प्याज खाने मिलेगा मगर देखते ही देखते प्याज के दामो में तो जैसे आग ही लग गयी। अब सडी और बर्बाद प्याज को देख बता नहीं सकती कितना दुख होता है। यहां खाने नहीं मिल रही वहां प्याज को गढढों में डंप किया जा रहा है। ये कैसी नीति समझ नहीं आ रही। वही सब्जी मंडी में किसान हितैषी सरकार के मुखिया के मुस्कुराते हुए पोस्टर लगे हैं।
पिछले दो महीनों में प्याज पर कई सारी स्टोरी करने के बाद जो कुछ दृश्य याद रह गये उनमें से कुछ को लिख दिया है मगर आपने गौर किया इन दृश्यों में सिर्फ दो लोग ही खुश दिखे एक नागरिक आपूर्ति निगम के अधिकारी दूसरी प्याज चरने वाली भैसें। बाकी प्याज उगाने वाला किसान घाटा खाकर दुखी दिखा तो प्याज बेचने वाला दुकानदार भी महंगा खरीद रहा और महंगा ही बेच रहा है उधर प्याज खरीदने वाली गृहिणी भी महंगी प्याज खरीदकर काटने से पहले ही प्याज के नाम के आंसू बहाती दीखी।

दो महीने पहले जब प्याज की आवक होनी शुरू हुयी थी तब ऐसा नहीं लग रहा था कि एमपी में प्याज इस दुर्गती को पहुंचेगी। मगर पहले किसान आंदोलन फिर किसान गोलीकांड और फिर बेक फुट पर आयी सरकार ने किसानों को खुश करने के लिये तो खरीदी का खजाना खोल दिया। प्याज खरीदेंगे दाल खरीदेंगे। सरकार ने जून से जुलाई तक डेढ लाख किसानों से सात सौ करोड रूप्ये की पौने नौ लाख मीटिक टन प्याज खरीद डाली। मार्कफेड की सहकारी समितियो की मदद से 67 मंडियों में प्याज तो खरीद लिया मगर अब इस प्याज को रखने की कोई व्यवस्था ही नहीं थी। नतीजे में पहले प्याज सडा, फिर फिका और बाद में औने पौने दाम पर व्यापारियों को बिका। निर्बाध पंद्रह साल पूरे करने जा रही किसान पुत्र मुख्यमंत्री की सरकार ने कभी भंडारण और प्रसंस्करण के बारे में कभी सोचा ही नहीं। छह लाख टन भंडारण का लक्ष्य है एक लाख टन रखने के भी इंतजाम नहीं है। यही वजह है कि प्याज के बंपर उत्पादन के दो महीने बाद ही महंगी प्याज खानी पडती है। उधर कुल प्याज खरीदी का एक प्रतिशत प्याज ही पीडीएस से बंटा। सरकार का रवैया किसान से खरीदो और बर्बाद करो का रहा ।

खैर प्याज की दुर्गति के बाद आने वाले दिनों में आलू की बारी है,,

 

 

ब्रजेश राजपूत,एबीपी न्यूज भोपाल

Please follow and like us:

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

mpheadline.com@gmail.com
http://www.facebook.com/mpheadline
SHARE