पोल-खोल के बहाने कांग्रेसी लगे नर्मदा में पार्टी की लुटिया डुबोने

मध्य प्रदेश में पिछले चौदह सालों से अपनी राजनीतिक ज़मीन तलाशती कांग्रेस इन दिनों पोल-खोल चौपाल के जरिए जनता के बीच पहुँचने का प्रयास कर रही है. जिसका मुख्य उद्देश्य बीजेपी की शिवराज सरकार की जनविरोधी नीतियों के खिलाफ लोगों को एकत्र कर वोटों में परिवर्तन करना है. जिसका भार कांग्रेस अध्यक्ष अरूण यादव के अलावा वरिष्ठ नेता अजय सिंह के कंधों पर भी आ गया है. यही कारण है कि अजय सिंह को नेता प्रतिपक्ष की जिम्मेदारी कांग्रेस ने दी है और नेता प्रतिपक्ष बनने के बाद से अजय सिंह सक्रिय भूमिका में भी आ गए है. एक साल बाद 2018 में होने वाले विधानसभा चुनावों में कांग्रेस को बहुमत मिले इसको लेकर लगातार जन सभाओं के साथ ही कार्यकर्ताओं से भी बैठकें की जा रही है.

लेकिन पिछले दिनों कांग्रेस ने पूरे प्रदेश में पोल-खोल चौपाल के आयोजन की बात कही और इसकी शुरूआत मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के विधानसभा क्षेत्र बुँधनी से ही की. लेकिन लगातार तीन चुनाव हार चुकी कांग्रेस में अब कार्यकर्ताओं का भी टोटा हो गया है. यही कारण है कि जब बुँधनी में कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अरूण यादव और अजय सिंह ने पोल-खोल चौपाल लगाई तो यहाँ जनता तो दूर की बात कांग्रेसी कार्यकर्ता भी चौपाल में नहीं पहुँचे. पंडाल में लगी कुर्सियों खाली ही पड़ी रही और मीडिया में बयानबाजी के बाद कांग्रेस के दिग्गज उल्टे पांव भोपाल वापस आ गए. कभी कांग्रेस का गढ़ रही बुँधनी विधानसभा सीट पर कांग्रेस अब जनता तो दूर अपने ही कार्यकर्ताओं को साथ में नहीं ले पा रही है.

दूसरी ओर 11 दिसम्बर 2016 से शुरू हुई नर्मदा सेवा यात्रा का समापन 15 मई को अमरकंटक में देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने किया है. 148 दिन चली नर्मदा सेवा यात्रा  के दौरान नर्मदा घाटी में सीएम शिवराज सिंह चौहान की टीम ने इस यात्रा के जरिए आगामी चुनावों के लिए एक ठूस जमीन भी तैयार कर ली. शायद इसी के प्रेरणा लेकर अब कांग्रेस प्रदेश के नर्मदा घाटी से लगी विधान सभाओं और आदिवासी क्षेत्रों में पोल-खोल प्रोग्राम चलाने जा रही है.जिसको लेकर नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अरूण यादव और कांग्रेस प्रदेश प्रभारी मोहन प्रकाश नरसिंहपुर, सिवनी, बालाघाट और मंडला जिलों की विभिन्न विधानसभाओं में 16 से 19 मई तक पोल-खोल चौपालों में शिरकत करने जा रहे है. ठीक नर्मदा सेवा यात्रा के समापन के बाद नर्मदा घाटी से लगे इन आदिवासी क्षेत्रों में कांग्रेस की पोल-खोल चौपाल कार्यक्रम का करना नर्मदा सेवा यात्रा से प्रेरित लगता है. लेकिन इन जिलों में नरसिंहपुर को छोड़कर सभी जिलों में कांग्रेस का अच्छा प्रभुत्व है. जहाँ नरसिंहपुर की चारों विधानसभा सीटों पर बीजेपी के विधायक काबिज है तो वही सिवनी की चार विधानसभा सीटों में से 2 पर कांग्रेस तथा एक-एक पर निर्दलीय और बीजेपी का विधायक है.जबकि बालाघाट की 6 विधासभा सीटों पर कांग्रेस और बीजेपी दोनों के बराबर-बराबर विधायक है. इन विधानसभा क्षेत्रों में कांग्रेस का जनाधार लगभग बीजेपी के बराबर ही है. लेकिन इन सभी विधासभा क्षेत्रों में अभी भी कांग्रेस  का अस्तित्व बचा हुआ है लेकिन पिछले तीन विधासभा चुनाव हार चुकी कांग्रेस अपनी वर्तमान सीटों को बचाने की जुगत में है.

बहरहाल पोल-खोल चौपाल के माध्यम से कांग्रेस जहां अपने नए नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह के दम को जांचना चाह रही है तो वही दूसरी ओर उन विधासभा सीटों पर भी अपना दबदबा कायम रखना चाहती है जहाँ वह पिछली बार जीती थी.  कुल मिलाकर प्रदेश में शिवराज सिंह चौहान की पिछ लग्गू की तरह कांग्रेस काम करती नज़र आ रही है. वरिष्ठ कांग्रेसीयों की माने तो इस चौपाल कार्यक्रम में जाकर अरूण यादव और अजय सिंह कांग्रेस की और भद्द पिटवाने पर तुले हुए है जबकि कमल छाप कांग्रेसी तो पहले से ही सक्रिय भूमिका में है और कांग्रेस की नैया पूरी तरह आगामी विधानसभी चुनाव में डुबोने पर तुले हुए.

लेखक- दिनेश शुक्ल, स्थानीय संपादक देैनिक मध्य स्वर्णिम

(लेख दैनिक मध्य स्वर्णिम समाचार पत्र में प्रकाशित हो चुका है)

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