निमोनिया को लेकर सरकारे गंभीर,12 नवम्बर वर्ल्ड निमोनिया डे विशेष…

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विश्व में शिशु मृत्युदर का एक सबसे बडा कारण निमोनिया है। निमोनिया के प्रति लोगों में जागरूकता हो इसी के चलते 12 नवम्बर को हर साल विश्व निमोनिया दिवस के रूप में मनाते है।विश्व में निमोनिया और डायरिया से सबसे अधिक मौते भारत सहित पाँच देशों में हो रही है,जिसमें नाइजीरिया, पाकिस्तान, डीआरसी और अंगोला शामिल है। इन देशों में शीर्ष पर भारत नाम आता है। विश्व में निमोनिया और डायरिया से बच्चों की होने वाली मौतों की संख्या, 2016 में 2,96,279 है।वही हर साल 59 लाख बच्चे, अपना 5 वां जन्मदिन मनाने से पहले ही मौत के मुँह में चले जाते है जिसमें दुनिया भर में दस्त के कारण 9% और निमोनिया से 16% बच्चों की मौत होती है।
भारत में हर एक मिनिट में एक बच्चा निमोनिया की भेंट चढ जाता है। हमारे देश में निमोनिया व डायरिया वैसे तो सामान्य बीमारियां मानी जाती हैं लेकिन देश में 5 वर्ष से कम आयु के बच्चों की सर्वाधिक मृत्यु इन रोगों के कारण ही हो रही है। भारत में वर्ष 2015 में ही करीब 3 लाख बच्चों को इनके कारण जान गंवानी पड़ी है। हालही एक अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट से इसका खुलासा हुआ है। विशेषज्ञों के मुताबिक रोग के लक्षणों को न समझपाना व सही समय पर उपचार न मिलपाना इसकी वजह हैं। इन्टरनेशनल वेक्सीन एस्से सेन्टर(आईवेक) की प्रोग्रेस रिपोर्ट 2014 के अनुसार हर 20 सेकेंड में दो मुख्य बिमारियाँ निमोनिया व डायरिया से 1 बच्चे की मौत हो जाती है। शिशु मृत्युदर की बात करे तो पाँच साल से कम उम्र के बच्चों की विश्व में प्रत्येक वर्ष 6.3 मिलियन मौतों में 15 प्रतिशत निमोनिया और 9 प्रतिशत डायरिया की वजह से मौत होती है।
भारत सरकार द्वारा राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अंतर्गत डब्ल्यूएचओ एवं यूनिसेफ के साथ मिल कर निमोनिया और दस्त की रोकथाम के लिए एकीकृत कार्य योजना 2014 बनाई गई। 8 नवंबर को स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने घोषणा कि है कि न्यूमोकोकल वैक्सीन (PCV) से निमोनिया से मुकाबला किया जाएगा।जिसके लिए अपने टीकाकरण कार्यक्रम में इसे चरणबद्ध तरीके से लागू करेगें।जिसके पहले फेज में हिमाचल प्रदेश, उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश और राजस्थान राज्यों का चयन हुआ है।इन राज्यों में पांच वर्ष से कम उम्र के बच्चों की आधे से अधिक मृत्यु होती है। इंडियन एकेडमी ऑफ पेडियाट्रिक्स के एक्जीक्यूटिव मैम्बर डॉ.उपेन्द्र दुबे बताते है कि निम्न लिखित बातों का ध्यान रखकर दस्त और निमोनिया की रोकधाम की जा सकती है जिसमें मुख्य रूप से
1.शिशु एवं छोटे बच्चों में उपयुक्त उपरी आहार की शुरूआत करना
2. हाथ धोना एवं व्यक्तिगत सफाई का ध्यान रखना
3. साफ पीने की उपलब्धता
4. दस्त लगने पर ओ.आर.एस.,जिंक एवं उपयुक्त एंटीबायोटिक की उपलब्धता एवं उसका उपयोग करना
वही डॉ.उपेन्द्र दुबे बताते है कि निमोनिया से बच्चों को बचाने के लिए वातावरण की स्वच्छता पर ध्यान के साथ ही घरों में प्रदूषण की कमी लाना बहुत जरूरी है। बच्चों को विटामिन ए का सप्लिमेंनटेशन,खसरा का टीका,हिब टीकाकरण,स्वास्थ्य संस्थाओं में ऑक्सीजन की उपलब्धता और समुदायिक एवं स्वास्थ्य संस्थाओं में उन्नत इलाज से बच्चों की जान बचाई जा सकती है।

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डॉ.उपेन्द्र दुबे का कहना है कि निमोनिया से होने वाली शिशु मृत्यु इसका सही इलाज न मिलने के कारण होती है जिसका कारण हमारे देश में अज्ञानता,अशिक्षा,गरीबी,सामाजिक मान्यताओं और रीतिरिवाज,चिकित्सकों की कमी,स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी, शासकीय चिकित्सालयों में इलाज के प्रति आविश्वास,झोलाछाप चिकित्सकों से इलाज करवाना इत्यादि बच्चों में मरने के मुख्य कारण है। अगर इन बातों पर भी ध्यान दिया जाए तो प्रतिवर्ष हजारों बच्चों की जान बचाई जा सकती है। तो दूसरी ओर कुपोषित बच्चों में निमोनिया के गंभीर होने की आशंका ज्यादा रहती है। हम अक्सर इस शब्द का इस्तेमाल तो करते हैं लेकिन इसके वास्तविक पैमाने के बारे में नहीं जानते। डॉ.उपेन्द्र दुबे के मुताबिक जिन बच्चों का वजन उम्र के अनुसार न होकर 20 प्रतिशत तक कम हो, साथ ही हाथ-पैर पतले हों तो उन्हें इस श्रेणी में रखा जाता है। चिकित्सकों के अनुसार नवजात बच्चे का वजन 2.5-3.5 किलो, 6 माह के बच्चे का वजन 7.5-8.5 किलो,1साल के बच्चे का वजन 9-10 किलो, 2 साल के 11-12 किलो, 3 साल के 13-14 किलो और 4 साल के बच्चे का वजन 15-16 किलो होना चाहिए। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने वर्ष 2007 में अनुशंसा की थी, कि जिन देशों में प्रति एक हजार बच्चों में 50 बच्चों की मौत उनके उम्र पाँच वर्ष पूरे होने से पहले हो जाती है उन्हें निमोनिया वैक्सीन को राष्ट्रीय टीकाकरण कार्यक्रम में सम्मलित करना चाहिए।
निमोनिया से बचाव के लिए बाजार में कुछ टीके उपलब्ध है जिन्हें लगवाना चाहिए।जिसमें निमोकोकल प्रमुख है।निमोनिया के प्रमुख कारणों में रोटावायरस डायरिया में शरीर से अत्याधिक मात्रा में पानी की कमी होने से डीहाइड्रेशन होने के कारण बच्चों में मृत्यु होती है।इसलिए ओ.आर.एस.,जिंक व रोटावायरस वैक्सीन के उपयोग से बच्चों में दस्त रोग एवं निमोकोकल वैक्सीन के उपयोग से निमोनिया रोग से होने वाली मृत्युदर अत्याधिक कमी लायी जा सकती है।अभी मध्यप्रदेश सहित कई राज्यों में हिब वैक्सीन का उपयोग किया जा रहा है। जिसका बाजार मूल्य लगभग 400 रूपए है वही यह सरकार को 130 रूपए में पड़ता है जिसे सरकार अपने टीकाकरण कार्यक्रम में शामिल कर मुफ्त में उपलब्ध करवाती है।वही भारत शासन द्वारा देश के चार प्रमुख राज्यों हरियाण,हिमाचल प्रदेश,उडीसा और आन्ध्र प्रदेश में रोटावायरस वैक्सीन शुरूआत की गई है।जबकि मध्यप्रदेश में वर्ष 2017 के अंत तक रोटावायरस वैक्सीन शुरूआत होने की संभावना है।

 लेखक- दिनेश शुक्ल, स्वतंत्र पत्रकार

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One Response so far.

  1. Titia says:

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