“डॉक्टर का डिनर सिंधिया की हैडलाइन”

वो पूरा दिन ही बहुत मारामारी वाला था, सीएम शिवराज सिंह के उपवास के आनन फानन में खत्म होने पर बडी मुशि्कल से भाई की शादी में जबलपुर जाने की छुट्टी मिली थी, मगर दो दिन बाद ही फिर भोपाल के भेल दशहरा मैदान के बाद टीटी नगर (शिवराज जी क्षमा करें जबान से तात्याटोपे नगर नहीं निकल पाता) दशहरा मैदान पर तंबू लग गया था।

जबलपुर से रात में लौटते ही सुबह अपन फिर नये दशहरा मैदान पर थे। तय था कि शिवराज और सिंधिया के इन तंबुओं की तुलना होनी थी। लिहाजा सिंधिया के सिपाहसलारों ने सतर्कता से तैयारी की थी। लंबे चौडे मंच के पीछे सिंधिया के रेस्ट रूम में खटिया, मटका और पुराना पंखा रखा था। इशारा था कि महाराजा के विश्राम कक्ष में किसानों सी शांति है। सुबह पंडाल की कहानी तो दोपहर में सिंधिया का भाषण तो शाम को मारामारी वाली प्रेस कांफ्रेंस कर रात घर लौटे ही थे कि मनोज का फोन आ गया यार वो डाक्टर का आज जन्मदिन है और उन्होंने घर पर डिनर पर बुलाया है । अचानक आयी इस नयी व्यस्तता से सहमते हुये मैंने कहा यार मन नहीं है कल चलेंगे। कमाल करते हो जन्मदिन आज है तो कल क्यों चलोगे, बस जल्दी चलेंगे और जल्दी आ जायेंगे ज्यादा लोग भी नहीं हैं तुम हम दीपक और एक दो ही लोग और हैं। चलो बस तैयार हो जाओ अभी आते हैं।
डॉक्टर साहब की डिनर पार्टी खत्म होते होते बारह बज गये, मगर हमारी बातें खत्म होने का नाम नहीं ले रहीं थीं, घर के बाहर भी बात करते हुये आधा घंटा गुजर गया तो अचानक दीपक को ख्याल आया कि चलो सिंधिया के सत्याग्रह का जायजा लेते हैं। बस फिर क्या था थोडी देर बाद ही हम दशहरा मैदान पर थे। रात के एक बजे थे और पंडाल में यहां वहां लोग सोये हुये थे। पंडाल के एक तरफ सिंधिया के पीए पाराशर और गोविंद राजपूत हंसी मजाक में जुटे थे, हमको देखकर उनके मुंह से यही निकला लो अब ये अा गये देखने कि पंडाल में सिंधिया हैं या नहीं। अरे भाई सिंधिया यहीं हैं और सो गये हैं। हंसी मजाक के इसी माहौल में पंडाल के कोने में लगे बिजली के तारों में अचानक स्पार्क होता है और पूरे पंडाल की बिजली चली जाती है। बाहर बैठे सिंधिया समर्थक घबडा जाते हैं तभी पाराशर के मोबाइल पर रिंग आती है यस सर कहकर वो बात करने लगते हैं हम समझ गये कि सिंधिया का फोन है बातों बातों में पाराशर, हम तीनों के आने का जिक्र करते हैं तो सिंधिया की तरफ से इशारा होता है अंदर भेज दो।

बस फिर क्या था थोडी देर बाद ही हम सिंधिया के सामने थे, बहुत साधारण सी सफेद टीशर्ट और लोअर पहने सिंधिया उनींदी आंखों से अपने बोर्डिंग स्कूल के किस्से सुना रहे थे कि बता रहे थे कि ऐसी खटिया, मटका और संदूक उनकी जिंदगी के हिस्से रहे हैं। मगर मैं ये देखकर हैरान था कि अरबों रूपये की संपत्ति के मालिक ग्वालियर राजघराने के चश्मोचिराग ज्योतिरादित्य जो टीशर्ट पहने थे उसकी गोल कालर कई जगह से घिसी और फटी थी।

बहुत सारी बातों के बाद आखिर हमसे रहा नहीं गया तो हमने पूछ ही लिया इस पुरानी टीशर्ट का राज क्या है। इस पर सिंधिया मुस्कुराये कहा यार मेरी मां भी मुझे यहीं शिकायत करती हैं मगर समझा करो भाई घिसे कपडे पहन कर सोने में थोडा आनंद आता है। बस फिर क्या था सब ठहाका मार कर हंस पडे। इसके बाद हमारी फरमाइश पर सिंघिया उसी फटी घिसी टी शर्ट पर पंडाल में सो रहे समर्थकों के बीच आये उनके बीच में गप्पें की,चुटकुले सुने सुनाये और इस बीच में हमने अपने मोबाइल से जो वीडियो बनाया वो अगले दिन हमारे चैनल की सुबह की हेडलाइंस बना।

आधी रात को सिंधिया अपने समर्थकों के साथ…डॉक्टर का डिनर सिंधिया की हैडलाइन पर खत्म होगा सोचा ना था।

 

-ब्रजेश राजपूत,एबीपी न्यूज,भोपाल

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