“चोर” आखिर कौन, किसने कहा कि मीडिया चोर है ?

-दिनेश शुक्ल, पत्रकार

भोपाल: मध्यप्रदेश विधान सभा में काँग्रेस विधायक और राष्ट्रीय सचिव जीतू पटवारी ने सदन में नर्मदा सेवा यात्रा के विज्ञापन दाताओ और विज्ञापन प्राप्त कर्ताओं को “चोर” शब्द से संबोधित किया जिस पर सत्ता पक्ष ने जमकर हंगामा किया और जीतू पटवारी से सदन से माफ़ी मांगने की बात कहीं. जीतू पटवारी सदन ने नर्मदा सेवा यात्रा के प्रचार के लिए दिए गए विज्ञापन के खर्च पर दो अलग-अलग उत्तरों से संतुष्ट नहीं थे. जब सत्ता पक्ष से सही उत्तर नहीं मिला तो जीतू ने सदन में कह दिया कि- “ये चोरों की मंडली है, चोरों को विज्ञापन देते है, यह उत्तर नहीं दे रहे” जिसे अध्यक्ष ने विलोपित करवा दिया…जबकि अपने बयान में कहीं भी जीतू ने मीडिया शब्द का उपयोग ही नहीं किया. लेकिन जनसंपर्क मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने इसे मीडिया से जोड़ते हुए सदन में पांच बार दोहराया कि “ये मीडिया को चोर कह रहे है,ये मीडिया को चोर कहा है”….

वहां उपस्थित लोगों को समझ में यह नहीं आया कि मीडिया को चोर कौन कह रहा था, जीतू पटवारी या फिर माननीय मंत्री महोदय. जीतू पटवारी ने चर्चा के दौरान एक बार फिर अपनी बात कही इस बार उन्होंने कहा कि- “अंधा अंधे को रेवड़ी बांटे. जर्नलिज्म वाले परेशान है, चोरों का एक गिरोह बन गया है.. जो ओरिजनल जर्नलिज्म वाले है, वह परेशान है”…. जीतू ने यहां यह भी स्पष्ट नहीं किया कि ओरिजनल जर्नलिज्म वाले क्यों परेशान है.

सवाल पूछा गया था नर्मदा सेवा यात्रा के लिए विज्ञापन पर खर्च किए प्रचार प्रसार पर किए गए कुल खर्च को लेकर जिसके दो अलग-अलग जवाब सत्ता पक्ष ने दिए पहले उत्तर में 18 करोड़ और दूसरी बार 21करोड़, जिससे काँग्रेस विधायक जीतू पटवारी असन्तुष्ट नज़र आए.

अब सवाल यहां यह उठता है कि बैकफुट पर कौन? वह जिसने मीडिया का नाम ही नहीं लिया या फिर वह जो सदन में यह कह रहा था कि मीडिया को इसने चोर कहा वह. मीडिया के लिए भ्रम की स्थिति बन गई है. किसी ने काँग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी को पत्र लिख डाला की जीतू पटवारी के खिलाफ कार्रवाई की जाए क्योंकि उन्होंने मीडिया को चोर कहा है. तो कोई जीतू पटवारी सहित पूरी काँग्रेस पार्टी को कटघरे में खड़ा कर रहा है इसे उपचुनावों में मिली जीत से जोड़ते हुए बहके विधायक का बयान बताया और जिसने मीडिया को चोर कहा उन मंत्री महोदय को चतुर और आक्रमक बताया अब समझ से परे है कि खिसियानी बिल्ली कौन और खम्मा कौन नोच रहा है.

काँग्रेस विधायक ने तो पत्रकार कक्ष में पहुँचकर दिए गए बयान की सफाई दे दी और ट्वीट कर संसदीय कार्य मंत्री को भी जवाब दे दिया. लेकिन सोशल मीडिया पर मंत्री नरोत्तम मिश्रा सफाई देते नहीं थक रहे. आखिर नरोत्तम मिश्रा को किसकी इतनी फिक्र है जिनसे वह तू तड़ाक से बात करते है या फिर सदन में बार-बार मीडिया को चोर कहने पर अफसोस जाहिर कर रहे है.

यह पहली बार नहीं है जब काँग्रेस विधायक को निशाना बनाया गया हो. इससे पहले उपनेता प्रतिपक्ष बाला बच्चन ने जब जनसम्पर्क विभाग द्वारा वेब साइड और एनजीओ मालिकों जिनको विज्ञापन देकर उपकृत किया गया था उनकी सूची मांगी थी जिसे सत्ता पक्ष ने सहज ही उपलब्ध करवा दिया था क्योंकि वह उन वेब साइड मालिकों के नाम खुद ही प्रचारित करना चाहती थी जो अपने रसूख का उपयोग कर विज्ञापन हासिल कर रहे थे. जो लिस्ट पेश की गई उसमें कई वेब साइड मालिको में मीडिया में कार्यरत लोगों की पत्नियों और बच्चों सहित प्रियासियों के नाम शामिल थे, यही नहीं जनसम्पर्क ऐसी फेक बेवसाइड को विज्ञापन दे रही थी जो कोई खोलकर ही नहीं देखता और तो और पार्टी विशेष के कार्यकर्ताओं की भी वेबसाइड इसमे शामिल थी. इसका परिणाम यह हुआ कि इसकी वजह से कई लोगों की तो मीडिया संस्थानों से नोकरी भी जाती रही. लेकिन सरकार की उपकृत करने वाली यह लिस्ट लगभग 180 से बढ़कर 200 हो गई अब उन्ही लोगों को तकलीफ़ है जो मीडिया को चोर बनाने पर तुले है. सवाल यहाँ यह है कि जो जीतू पटवारी ने सदन में कहा उसमें सच क्या है और झूठ क्या है…

क्योंकि यह बात सही है….”अंधा अंधे को रेवड़ी बांटे. जर्नलिज्म वाले परेशान है, चोरों का एक गिरोह बन गया है.. जो ओरिजनल जर्नलिज्म वाले है, वह परेशान है”….

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