क्या यह बस वक्त की ही बात है या एचआईवी को हराना नामुमकिन है?

vishwa-Aids-Diwas-2015भोपालः रोजाना, करीब 15,000 लोग एचआईवी यानी एड्स से पैदा करने वाले वायरस से संक्रमित होते हैं. आखिर में, उनमें से हर मरीज की मौत हो जाती है. तीन दशक के गहन शोध और करीब दुनिया भर में तकरीबन 3.90 करोड़ लोगों की मौत के बाद भी, इस वायरस की वैक्सीन को लेकर कोई उम्मीद नहीं जगी है.

वैज्ञानिकों को टायफाइडड का वैक्सीन तैयार करने में 105 साल, काली खांसी का वैक्सीन बनाने में 89 साल, पोलियों के लिए 47 साल और खसरे के लिए 42 साल लगे. लेकिन, इसके बाद वक्त महत्वपूर्ण तरीके से कम होता गया. हेपेटाइटिस बी के वैक्सीन की खोज में महज 16 साल लगे.

तो क्या यह बस वक्त की ही बात है या एचआईवी को हराना नामुमकिन है? आज की तारीख में जैव-चिकित्सा शोध के क्षेत्र में एड्स की वैक्सीन की खोज सबसे अहम समस्या है.

 क्यों नहीं मिल रही है सफलताः
एड्स रोकने का एक हथियार वह टीका ही हो सकता है जो एचआईवी के सभी प्रकारों के प्रति सौ फीसदी सुरक्षा प्रदान करे. वैज्ञानिकों के सामने आने वाली सबसे बड़ी चुनौती तो इस वायरस की खुद की जेनेटिक जटिलता ही है.

एचआईवी के दो प्रकार है, और दोनों के ही तीन उप-प्रकार भी है. विभिन्न महाद्वीप अलग किस्म के उप-प्रकार से प्रभावित है. अब तक, वैज्ञानिकों ने इस वायरस के 10 विभिन्न पैटर्न की पहचान की है लेकिन इनकी संख्या अधिक हो सकती है. जैसे ही वैज्ञानिक एक वायरस को समझते हैं और उसके मुताबिक आगे बढ़ते हैं तब तक यह वायरस खुद में आमूलचूल बदलाव ले आता है. अगर कोई टीका उपलब्ध भी हो और मानव शरीर में टीकाकरण के बाद बनी संरक्षक प्रतिरोधी प्रतिक्रिया के सुरक्षा कवच से भी एचआईवी के विभिन्न रूप, वायरस के किसी न किसी प्रकार को ‘भगा’ ही लेंगे.

इसके लिए शोध पर 10 अरब अमेरिकी डॉलर खर्च किए जा चुके हैं और करीब 80 चिकित्सकीय परीक्षण भी किए जा चुके हैं. इनमें बैंकॉक में साल 2011 में किया गया वृहद् ट्रायल भी शामिल है. मुमकिन है कि हम इस वायरस को समझने के बेहद करीब हैं लेकिन हम किसी व्यावहारिक टीके के आसपास भी नहीं पहुंच पाए हैं. खुद क्लीनिकल परीक्षणों को लेकर भी बड़ी समस्या है. जब लोग एक एचआईवी ट्रायल के साथ जुड़ते हैं तो इसके संक्रमण की प्रकृति की वजह से उन्हें लेकर नैतिक चिंताएं भी होती हैं. जबकि, जानवरों पर किए गए ट्रायल अधिक कामयाब नहीं होते क्योंकि बंदरों में एचआईवी का प्रकार इंसानों जैसा तो है लेकिन यह प्रकार समान नहीं है. मौजूदा वक्त में, दुनिया भर में टीके के 22 प्रकारों का परीक्षण किया जा रहा है. अच्छी खबर ये है कि इन सारे शोधों में इस बीमारी के अधिक असरदार इलाज के नतीजे हासिल हुए हैं।

 आखिर क्या है त्रुवादा क्रांति

किसी टीके का विकल्प एक निरोधक गोली हो सकती है और अब अमेरिकी वैज्ञानिको ने एक ऐसी गोली खोज ली है. त्रुवादा एक मिश्रित दवा है जिसे संक्रमण के इलाज के लिए विकसित किया गया है लेकिन अध्ययनों से पता चला कि अधिक जोखिम वाली आबादी को यह दवा देकर उनके एचआईवी से संक्रमण के जोखिम को 90 फीसदी तक कम किया जा सकता है.

यह एक उल्लेखनीय उपलब्धि है क्योंकि ऐसा पहली बार हुआ है जब हमारे पास एचआईवी की रोकथाम के लिए अमेरिकी एफडीए से स्वीकृत एक दवा है. सच में, यह एक वरदान ही है और इसकी जरूरत हमें लंबे समय से थी. वैज्ञानिकों ने अमेरिकी मेडिकल एसोशिएसन की पत्रिका में यह बताया है कि यह दवा इतनी असरदार है कि इस अध्ययन में हिस्सा ले रहे 500 लोगों में से सिर्फ 2 में ही साल भर चले अध्ययन के दौरान संक्रमण हुआ. ऐसा तब हुआ जब स्वयंसेवकों ने लगातार जोखिम भरे असुरक्षित रूप से सेक्स भी किया.

भारत में करीब 20 लाख एचआईवी पीड़ित बेहद जोखिम के स्तर पर हैं और उन्हें इस गोली से काफी फायदा होगा. त्रुवेदा के ब्रांड नाम से बिक रही इस दवा को आलोचकों ने खारिज कर दिया है. उनकी चिंता है कि यह दवा असुरक्षित यौन संबंधों को बढ़ावा देगी और इस तरह संक्रमण के मामले बढ़ जाएंगे. निश्चित रूप से, क्यों बेहद कम लोग यह दवा खा रहे हैं, यहां तक कि ज्यादातर डॉक्टर भी ऐसे ‘जोखिम-पूर्व रोगनिरोधक’ उपचार के अस्तित्व में होने की बात से अनजान हैं.

चूंकि, अभी कोई टीका मौजूद नहीं है ऐसे में त्रुवेदा एड्स मुक्त पीढ़ी के सपने को सच बना सकता है. इसकी असल समस्या है इसकी कीमतः त्रुवादा का मासिक कीमत 5 लाख रूपये से अधिक हो सकती है.

विश्व भर के स्वास्थ्य संगठन मिलकर एक एड्स कार्यक्रम की रूपरेखा तय कर सकते है कि एचआईवी को रोकने के लिए टीके का विचार छोड़ दिया जाए. और तब, कीमत ऊंची रहने पर भी, एचआईवी को रोकने पर खर्च किया गया हर डॉलर आगे चलकर बेहतकर परिणाम देगा.

Please follow and like us:

One Response so far.

  1. Melly says:

    Thank you for this beautifully inspiring essay. Prnslsfiooaely, I combine the areas of intimate partner violence recovery and sexual pleasure, and can identify with what you've written on many levels. I'll be dropping you an email shortly.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

mpheadline.com@gmail.com
http://www.facebook.com/mpheadline
SHARE